Sunday, 20 August 2017

नमन



मोहब्बत लिख के भेजा था वो चिट्ठी लौट आई है 
डाकिये ने लिखा है अब इस पते पर कोई नहीं रहता.
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दिल है बर्बाद मगर खुश हूँ इस आबादी पर
उसका कब्ज़ा है मेरे दिल की इस आबादी पर.
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हुश्न वालों से कायम है आधी दुनिया 
बाकी आधी को इसी हुश्न ने बर्बाद किया.
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कितनों को उम्र भर पामाल किया है उसने
वो एक शख्स जो दामन उठाए जाता है. 

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इश्क का रोग  है तो जान लेकर जायेगा
जब तलक जियेंगे हमें उम्र भर सताएगा.
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बहुत दिनों से किसी ने नहीं दिया धोखा
इन दिनों यार की कमी बहुत सताती है.
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है ज़हरीली जुबान और आस्तीन में खंजर है
जिस तरफ देखिये दुनियां में यही मंजर है.
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ए मेरा मुल्क है इसकी इबादत रोज करता हूँ  
इसी पर जान देता हूँ, इसी से प्यार करता हूँ.
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तुझे हक है की तु बेशक इसे दीवानगी कह ले 
वतन पर जान देने को मेरी बेहूदगी कह ले.
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आसमान रो रहा है हर तरफ मातम ही मातम है
हुकुमत कह रही है ए बच्चो के मरने का मौसम है.

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मैंने आवाज़ दी खुशियों को चले आये गम 
तब ए जाना की हमदम है ख़ुशी और ए गम.
नमन 

Monday, 14 August 2017

मस्जिद की बात हो न शिवालों की बात हो


कल १५ अगस्त है. हम सब स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहे हैं.
१८५७ की क्रांति के महानायक बहादुरशाह जफ़र, जिन्होंने भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का नेत्रित्व किया था का शेर याद आ रहा है ...
"नाहक को तेरे दिल में भटकाव पड गया
काबे में जो है शेख वही बुतकदे में है."
भारत की संविधान सभा , जिसने भारत का संविधान बनाया उसमे पर्याप्त संख्या में मुसलमानो का प्रतिनिधित्व था. आज अगर उस संविधान सभा द्वारा बनाये गए संविधान को कोई मुस्लिम नकार रहा है तो वह भारत का नागरिक कैसे हो सकता है?
मद्रास से मोहम्मद इस्माइल साहिब ,टी. एम. अहमद इब्राहिम, महबूब अली बेग साहिब बहादुर, ....
बॉम्बे से अब्दुल कादर मोहम्मद शेख, आफताब अहमद खान,.... बंगाल से रघीब अहसान,, जासिमुद्दीन अहमद, नज़ीरुद्दीन अहमद, अब्दुल हमीद, अब्दुल हलीम गज़नवी, ....
संयुक्त प्रान्त से बेगम ऐज़ाज़ रसूल, हैदर हुसैन, हसरत मोहानी, अबुल कलाम आजाद, मोहम्मद इस्माइल खान, रफी अहमद किदवई, मो. हफिजुर रहमान,....
बिहार से, हुसैन इमाम, सैयद जफर इमाम, लतिफुर रहमान, मोहम्मद ताहिर, तजमुल हुसैन, चौधरी आबिद हुसैन, ....... मध्य प्रांत से काजी सैयद करीमुद्दीन,..... असंम से, मुहम्मद सादुल्लाS, अब्दुर रऊफ,........
जम्मू कश्मीर से, शेख मुहम्मद अब्दुल्ला, मोतीराम बैगरा, मिर्जा मोहम्मद अफजल बेग, मौलाना मोहम्मद सईद मसूदी,.....
कोचीन से के ए मोहम्मद आदि विद्वान् मुस्लिम नेताओं ने न केवल संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई बल्कि उसे स्वीकार भी किया.
फिर आज ऐसा क्या हो गया की आज कुछ मुसलमान को अपने ही पितामहों द्वारा बनाये गए संविधान पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं. उपरोक्त जिन मुस्लिम नेताओं ने संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई वे सबके सब आज के किसी भी मुस्लिम नेता या मौलवी से ज्यादा विद्वान् और बुद्धिमान थे. इन सभी को मुस्लिम समाज के हितों और भविष्य की चिंता थी. अतः इन्होने भारत के संविधान में वे सभी ध्राएँ शामिल करवाई जो भारतीय मुसलमानों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी थे.
उसके बाद भी जो मुस्लिम नेता अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए संविधान और कानून का विरोध कर रहे हैं, संविधान की मूल भावना के खिलाफ ज़हर उगल रहे हैं वे देश से ज्यादा मुसलमानो का नुकसान कर रहे हैं.
एक तरफ आरएसएस, विश्व हिन्दू परिषद् ,बजरंग दल , हिन्दू वाहिनी, गौरक्षक दल और उनकी संरक्षक बीजेपी देश को धर्मान्धता का पाठ पढ़ा रहे हैं दूसरी तरफ ओवैसी, आज़म खान, और उन जैसे मुस्लिम नेता उस आग में घी डाल रहे हैं.
ये सब देश और समाज का कितना अहित कर रहे हैं इन्हें स्वयं नहीं पता.
सभी देशवासी भाई बहनों से प्रार्थना...
मस्जिद की बात हो न शिवालों की बात हो
जनता की बात, उसके सवालों की बात हो.
पूजा की बात हो न अजानों की बात हो
हर आदमी के मुंह के निवालों की बात हो.
यदि हो सके तो गाय और गोबर को भुलाकर
बारिश में ढहती घर की दीवालों की बात हो.
भाषा और धर्म ,जाति की बातें बहुत हुई
इंसानियत की उम्दा मिसालों की बात हो.
बिके हुए अखबारों की चर्चा को छोड़ कर
ईमानदार चंद रिसालों की बात हो.
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की अनंत हार्दिक शुभकामनायें!
आपका,
नमन

Sunday, 13 August 2017



मस्जिद की बात हो न शिवालों की बात हो
जनता की बात, उसके सवालों की बात हो.
पूजा की बात हो न अजानों की बात हो
हर आदमी के मुंह के निवालों की बात हो.
यदि हो सके तो गाय और गोबर को भुलाकर
बारिश में ढहती घर की दीवालों की बात हो.
भाषा और धर्म ,जाति की बातें बहुत हुई
इंसानियत की उम्दा मिसालों की बात हो.
बिके हुए अखबारों की चर्चा को छोड़ कर
ईमानदार चंद रिसालों की बात हो.

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ज़ख्म सह कर भी मुस्कराता हूँ
मैं मोहब्बत के गीत गाता हूँ.
वो बेवफा है मगर उसको
खुद बुला कर गले लगाता हूँ.
जिसने छीना है अमन चैन मेरा
उसको अपना खुदा बताता हूँ.
ज़ख्म मेरी पीठ पर जियादा हैं
पर ज़ख्म सीने के दिखाता हूँ.
जिन शहीदों से मुल्क है कायम
उनके कदमो में सिर झुकाता हूँ.
हैं मोहब्बत की पैदावार सभी
मैं मोहब्बत उन्हें सिखाता हूँ.

Tuesday, 18 July 2017

चाहत की कहानी


किसी के आंसू लिए
और किसी का दर्द लिया
किसी की तन्हा रातों की 
स्याही ले ली ...

किसी के कांपते होठों की 
चुप्पी पढ़कर 
किसी के टूटे हुए दिल की 
गवाही ले ली ...

किसी की सूनी आंखों में 
झांककर देखा
किसी की टूटी चूड़ियों से 
जुबानी ले ली ....

जवान दिनों से लिया
इश्क का जज्बा हमने
नाजनीनों से हमने
मोहब्बत की कहानी ले ली..

किसी को अपना बनाया
किसी को प्यार किया
खुशबू फूलों से ली
नदियों से रवानी ले ली ..

कोयल से आवाज ली
भंवरों से गुनगुनाना लिया
इस तरह हमने दुनिया का
सब खजाना लिया..

और इस तरह जब
कोई गजल कही हमने
अपनी सखियों से तब
चाहत की कहानी ले ली...
नमन

Monday, 10 July 2017

याद


याद इतना भी आना ठीक नहीं
बेवजह दिल जलाना ठीक नहीं.


अब तो बाहों में मेरी आ जाओ 
सब्र को आजमाना ठीक नहीं.


जब मोहब्बत करो तो खुलके करो

छिपके मिलना मिलाना ठीक नहीं.

और कितनी सजा दोगे हमको
रूठ कर यूं सताना ठीक नहीं.


अब यह दूरी सही नहीं जाती 

दूर रहकर रुलाना ठीक नहीं.
नमन


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उनकी आस्तीनों में सांप पलते हैं
वो खंजर छिपा के गले मिलते हैं.

ए कैसा वक़्त आ गया है की 

अपने अपनों का क़त्ल करते हैं.

कैसे भगवान् हैं वह जिनके भक्त 

फांसी लगा के मरते हैं.

लूट कर हमें  हमारे कारिंदे 

मेरी पैसों से मदद करते हैं.

रीढ़ में हड्डियाँ नहीं जिनके

वो जंगजू होने का दम भरते हैं.

जो जलते बुझते हैं जुगनुओंकी तरह 

वो सूरज होने की डींग मारते हैं . 

नमन

आधी रात के बाद


घर कच्चे थे, सड़कें कच्ची पर ईमान के पक्के थे
मेरे दादा, बाबा, काका सब जुबान के पक्के थे.
महलों में रहने वाले धनपशु ईमान के कच्चे हैं
भूख गरीबी और बीमारी इनके नाजायज बच्चे हैं.
नमन

- आधी रात के बाद -
सबसे पहले बिका था
सरकारी अधिकारियों का ईमान
वो भी बहुत सस्ता
चंद सिक्कों में
बिकता था वह...
फिर बिकी
नेताओं की आत्मा
खुले आम
सड़को, गलियों,चौराहों
संसद और विधान सभाओं में ...
फिर चुपके से
बिना शोर शराबे के बिका
समाचार
खरीद लिया उसे
धनपशुओं ने ...
अंत में
बोली लगायी गई
बची खुची
आशा की किरण
न्यायतंत्र की...
आम आदमी के जीवन में
बचा है
सिर्फ अंधेरा
आखिर रात के १२ बजे
अँधेरे में पैदा हुआ था
मेरा देश !
'नमन'

दोस्तों से दोस्ती


   दोस्तों से दोस्ती
दोस्तों से दोस्ती की बात करिए
दुश्मनों पर वक्त पर आघात करिए.
जो भी अपने हैं उनके गले लग कर
उन सभी पर प्रेम की बरसात करिए.

कह दीजे यदि किसी से प्यार करिए
बेवजह मत जब्त ए जजबात करिए.
धर्म अच्छा है उसे घर पर ही रखें
बेवजह सड़कों पर मत खुरापात करिए.
नफरतों को भुलाकर यदि हो सके तो
आज से ही प्रेम की शुरुआत करिए.
नमन

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तुमसे बेहतर कोई कहे तो सुनें
उससे बेहतर कोई कहे तो सुनें.
हर तरफ शोर है जहालत है
वॉइज अगर चुप रहे तो सुनें. नमन

Sunday, 18 June 2017

हवा महल

                                                         हवा महल 
1 जुलाई 2017 से जीएसटी पूरे देश में लागू होने जा रहा है परंतु जीएसटी को लेकर पूरे देश का मीडिया खामोश बना हुआ है .
क्या आपने जीएसटी पर न्यूज़ चेनलो में कोई बहस होते हुए देखी है ?
देश का कर ढांचा आमूलचूल ढंग से बदल रहा है लेकिन न्यूज़ चैनलो पर कोई चर्चा नहीं, कहीं कोई विचार-विमर्श नहीं. जीएसटी की अच्छाइयों और कमियों पर विस्तार में चर्चा होनी जरूरी थी और है.
देश के बहुत से हिस्सो मे जीएसटी को लेकर व्यापारी संगठनों ने बंद रखा , लोकल अखबारों ने उस पर रिपोर्टिग की है, लेकिन राष्ट्रीय परिदृश्य से यह खबर गायब है कि क्यों व्यापारी इसका विरोध कर रहे हैं.
कभी कभी सत्य और धारणा में जमीन आसमान का अंतर होता है .
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अपने विजुअल प्रभाव की वजह से लोगों की धारणाएं बनाने का काम करती है अक्सर यह धारणाएं सत्य से परे होती हैं.
दरअसल मीडिया में इतनी ताकत होती है कि वह किसी भी मसले को हमारे दिमाग में भर दे.
हिंदुत्व, छद्म राष्ट्रवाद, गाय और बीफ, रोहित बेमुला, JNU, कश्मीर आदि घटनाओं का उपयोग करके देश की समस्याओं से जनता का ध्यान हटाना और गैर जरूरी बातों पर चर्चा करके जनमत तैयार करना जैसे काम आज की मीडिया कर रही है.
नोटबंदी से कालाधन,नक्सलवाद और आतंकवाद का खात्मा करने की बात करने वाली मोदी सरकार नोटबंदी के 8 महीने बाद तक नोटबंदी से आए हुए रुपए नहीं गिन पाती है. हमारे लोकतंत्र का इतना बड़ा मजाक और क्या हो सकता है?
स्वछता अभियान में लगभग ढाई करोड़ शौचालय बनाने की बात मोदी सरकार कर रही है. यह औसतन 40 शौचालय प्रति गांव होता है. देश के किस गांव में 40 शौचालयों का निर्माण हुआ क्या कोई भक्त मुझे बता सकता है.
प्रतिवर्ष दो करोड़ नौकरियां देने का वादा करने वाली मोदी सरकार प्रतिवर्ष दो लाख नौकरियां देने में भी असफल रही है. परंतु मीडिया में इस बात पर कहीं कोई चर्चा नहीं होती.
विदेशी निवेश के लिए भीख मांगते हुए मोदी सौ से ज्यादा देश घूम आए हैं परंतु अब तक वास्तविक विदेशी पूंजी निवेश कितना हुआ है इसका कोई आंकड़ा रिजर्व बैंक तक के पास नहीं है.
देश की वास्तविकताओं से परे मीडिया लोगों को हिंदुत्व, लव जेहाद, बीफ, पाकिस्तान जैसी बातों में उलझाकर सरकार की मुश्किलें आसान कर रहा है.
देश की प्रगति की जो हवाई बातें मीडिया लगातार कर रहा है उससे मुझे अकबर बीरबल का एक किस्सा याद आता है .
अकबर ने बीरबल से कहा कि क्या हवाई महल बन सकता है ?
बीरबल ने कहा क्यों नहीं हुजूर, बिल्कुल बन सकता है
अकबर ने कहा तो फिर आप निर्माण शुरू करिए. बीरबल ने कहा हुजूर तैयारी के लिए 10हजार मोहरें खजाने से देने का इंतजाम करिए.
10 हजार मोहरें लेकर और कुछ महीने तैयारी के लिए छुट्टी लेकर बीरबल महल से घर चले आते हैं.
बीरबल ने दूर दूर से तोते पकड़ने वालों को बुलाया और उनसे तोते खरीद कर उन्हें तोतों को, " ईंटा लाओ-गारा लाओ, महल बनाओ" बोलने की ट्रेनिंग दी.
कुछ महीनों बाद बीरबल अपने तोतों के साथ वापस अकबर से मिलने पहुंचे. अकबर ने उनसे पूछा कि हवा महल बनाने का काम कब शुरु होगा?
तब बीरबल अपने सेवकों को तोतों को पिंजरे से आज़ाद करने की आज्ञा दी. पिंजरे से निकलकर तोते "ईंटा लाओ-गारा लाओ, महल बनाओ " रटते हुए पूरे महल में उड़ने लगे.
अकबर ने बीरबल से पूछा कि यह क्या है? बीरबल ने कहा- हवा महल बन रहा है हुजूर.
ऐसे ही मोदी जी और मीडिया मिलकर पिछले 3 साल से भारतीय जनता को हवामहल का सपना दिखाकर बेवकूफ बना रहे हैं.

Thursday, 8 June 2017

किसान और सरकार


                                  किसान और सरकार 
मोदी जी की अनुभवहीनता और एकला चलो कार्यपद्धती के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं.
देवेगौडा के बाद मोदी जी देश के दूसरे सबसे कम अनुभवी प्रधानमंत्री हैं. राजीव गांधी में भी प्रशासनिक अनुभव की कमी थी पर उसे नरसिम्हाराव, प्रणव मुखर्जी, कमलापति त्रिपाठी, शंकर राव चव्हाण जैसे वरिष्ठ नेता पूरा कर देते थे.
मोदी जी ने प्रधानमंत्री बनते ही लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी ,जसवंत सिंह, यशवंत सिन्हा जैसे वरिष्ठ सहयोगियो को किनारे कर दिया.
सारे निर्णय पीएमओ के अधिकारी लेते हैं और कैबिनेट में सिर्फ उस पर मुहर लगाई जाती है, जो एक गलत परंपरा है .
एक तरफ जहां कांग्रेस में यह परंपरा रही है कि हर निर्णय के लिए कई कई मीटिंग में कई कई बार चर्चा के बाद और कई मामलों में तो तो महीनों विचार-विमर्श होने के बाद निर्णय लिए जाते थे ........
वही मोदी जी के कुछ वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मोदी जी को एक प्रेजेंटेशन देते हैं और मोदी जी उनसे प्रभावित होकर बिना अपने दूसरे वरिष्ठ सहयोगियो को विश्वास में लिए निर्णय ले लेते हैं. जिनका दुष्परिणाम अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है.
मोदी जी ने प्रधानमंत्री बनते ही योजना आयोग का नाम बदलकर नीति आयोग कर दिया. नाम बदलने के अलावा योजना आयोग के पूरे ढांचे में कोई मूलभूत परिवर्तन नहीं किया गया.
तो फिर नाम बदलने की इतनी क्या जल्दी थी कि कुर्सी पर बैठते ही नाम बदलो मोहिम शुरू करें.
ऐसे ही नोटबंदी का निर्णय लिया गया.
नोट बंदी बुरी नहीं थी, इसके पहले की सरकारों ने भी कई कई बार नोटबंदी की.
पर जिस ढंग से उसको लागू किया गया उसने पूरे सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया .
अदूरदर्शिता का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है जिसकी वजह से 60 दिनों में लगभग 60 बार सरकार को अपने नियम बदलने पड़े. यह स्वयं दिखाता है कि मोदी जी ने आनन-फानन में यह निर्णय लिया था.
नोटबंदी से न तो नक्सलवाद बंद हुआ ना आतंकवाद. ना तो कालाधन ही पकड़ा गया.
हद तो यह है कि सरकार आज तक नहीं बता पा रही है कि नोटबंदी के बाद कितने 500 और 1000 के नोट रिजर्व बैंक में वापस आए.
नोटबंदी की वजह से न केवल करोड़ों नौकरिया गई बल्कि सरकार को लाखों करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा वह अलग से.
बैंक की लाइन में कितने लोग मरे , कितनी शादियां रद्द हुई , कितने लोग पैसा ना दे पाने की वजह से बिना इलाज के मर गए, उनकी गणना होना अभी बाकी है.
मोदी जी की अदूरदर्शिता की वजह से कश्मीर में आतंकवाद ने पुन: सर उठा लिया है.
जिस आतंकवाद को कांग्रेस के अथक प्रयत्नों की वजह से घाटी के 4 जिलों तक सीमित कर दिया गया था वह पूरे जम्मू कश्मीर में फैल चुका है.
प्रधानमंत्री मोदी का बिन बुलाए बिरयानी और केक खाने पाकिस्तान चले जाना, विदेशों में गार्ड ऑफ ऑनर के समय राष्ट्रगीत चालू रहने पर भी मोदी जी का चल देना, कोड ऑफ कंडक्ट का पालन न करना, अपनी फोटो खिंचवाने के लिए दूसरों को बगल में कर देना जैसे अपने कार्यों के वजह से मोदी जी ने पूरे विश्व में भारतीय प्रधानमंत्री के पद की गरिमा को कम किया है.
अभी 2 साल बाकी है . मोदी जी को चाहिए कि बीजेपी के अपने सभी वरिष्ठ सहयोगी राजनाथ सिंह ,मुरली मनोहर जोशी ,लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज ,वेंकैया नायडू आदि के साथ बैठकर चर्चा करके सरकार के आगे के फैसले लें ताकि उन्हें सब बाद में शर्मिंदा ना होना पड़े.
साथ ही जो गलत फैसले वे ले चुके हैं उन्हें वापस लेने में कोई बुराई नहीं है , इससे उनका बड़प्पन ही होगा.
पंडित नेहरू से प्रभावित होकर मोदी जी ने खुद को चौकीदार घोषित किया, पंडित नेहरू संसद को प्रजातंत्र का मंदिर कहते थे , उनसे प्रभावित होकर मोदी जी ने संसद की सीढ़ी पर माथा टेका. पंडित नेहरू रेडियो पर भारत की जनता को संबोधित करते थे , उनसे प्रभावित होकर मोदी जी ने प्रति माह भारत की जनता से मन की बात की.
अत: मोदी जी से विनम्र अनुरोध है कि पंडित नेहरू की एक और बात का अनुसरण करें.
पंडित नेहरु संसद में और संसद से बाहर विरोधी पक्ष के नेताओं को उनकी बात कहने का न केवल पूरा मौका देते थे बल्कि उन्हें प्रोत्साहित करते थे कि वह अपनी बात करें.
निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाय
बिन पानी साबुन बिना निर्मल करे सुभाय.
आदरणीय मोदी जी अगर विपक्ष के नेताओं की बात सुनेंगे तो शायद अपनी कुछ कमियों का परिमार्जन कर पाएंगे.
आशा करता हूं कि इसके आगे प्रधानमंत्री जी सामूहिक नेतृत्व को स्थान देंगे और BJP के सारे नेता मिलकर देश को प्रगति के पथ पर आगे ले जाने में मदद करेंगे.
नमन

Wednesday, 3 May 2017

वजह


यूँ बेवजह न प्यार से हमको पुकारिए
है प्यार अब गुनाह सियासत की नजर में. 

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हमने बरसों से मोहब्बत को खुदा माना है 
अपने महबूब की बातों को दुआ माना है.
इश्क मजहब है और ग़ज़लें ही भजन है मेरा
हमने दुनिया के रिवाजों को कहाँ माना है?

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मरने की मनाही है जीने भी नहीं देते
हाथों में जाम है पर पीने भी नहीं देते.
मैं जिसको चाहता हूँ जो है मेरा मुकद्दर
कैसे उसके ख्वाब देखूं सोने भी नहीं देते. 

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तमाम रात अंधेरे से जंग जारी थी
हर जुगनू की मर मिटने की तैयारी थी.
सुबह हुई तो जुगनुओं का कहीं पता न था 
सुबह की रात में सोए हुओं से यारी थी.


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दर्द हैं , आंसू हैं, गम है और तन्हाई है 
जिंदगी हमें ए किस मोड़ पर ले आई है.
मैं तेरे गम में शामिल तो नहीं हो सकता 
तेरे ग़म में मगर आंखें मेरी भर आई है.

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--खबरें रखैल है--
खबरें रखैल हैं
सत्ताधीशों की
पूंजी पतियों की 
भ्रष्ट अफसरों की...
रोज ब रोज
काला होता है
अखबारों का
मुख (पत्र )
बदनाम
बिकी हुई खबरें
फैलाती हैं सनसनी...
संपादक
बदनाम गली के बाहर
तैनात
वह पुलिसिया है
जो मजबूरी में
दूसरी तरफ देखते रहता है
आखिर उसका भी पेट है...
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया
इस धंधे को
ले आया है
पांच सितारा
संस्कृति तक
वहां खबरें
चमकती हैं
मटकती हैं
बिकती हैं
उंचे भाव में
इज्जत से ....
'नमन'